कोरोना वैश्विक महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद से ही स्कूल बंद पड़े हैं। ऐसे में बच्चों को टीचर ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे है। 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस बार शिक्षक दिवस भी ऑनलाइन ही मनाया जाएगा। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में जब कुछ टीचरों से बात की गई तो सामने आया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों ने लॉकडाउन दौरान क्या कुछ नहीं किया।
किसी शिक्षक ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके बच्चों को डाक के माध्यम से पुस्तकें पहुंचाई तो किसी शिक्षक ने गांव से दूर 5 किलोमीटर जाकर उनके घरों तक शिक्षा दी। एक स्कूल ऐसा भी है जिसे लॉकडाउन में अपनी स्कूल की खुद की वेबसाइट तैयार की। जो जिला की पहली स्कूल की वेबसाइट थी। वेबसाइट के माध्यम से बच्चों को जोड़कर पढ़ाया गया।
गूगल पे से बच्चों के खाते में डलवाये पैसे
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नेजाडेला कलां में साइंस टीचर अमित ग्रोवर ने बच्चों को पढ़ाने का नया तरीका निकाला। इसके लिए अमित ने डाक के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को पुस्तकें उनके घर द्वार तक पहुंचाई। किताबें व कापियां खरीदने के लिए अभिभावकों के मोबाइल पर गूगल पे से 150 रुपये भेजते थे।
जमाल के सरकारी स्कूल की बनाई वेबसाइट
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल जमाल की इंचार्ज वृंदा बांसल ने बताया कि लॉकडाउन दौरान बच्चों को पढ़ाने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उस दौरान स्कूल के सदस्यों ने बैठकर सुझाया की क्यों न स्कूल की वेबसाइट तैयार की जाए। उसी दौरान स्कूल की एक वेबसाइट तैयार की गई।
बेटी ने भी दिया साथ, घरों में जाकर पढ़ाया
गांव सुखचैन स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के अध्यापक राजपाल वर्मा की लॉकडाउन में प्रशासन द्वारा कोविड-19 में सुपरवाइजर के रूप में सर्वे करने की ड्यूटी लगाई गई थी। दिनभर ड्यूटी करने के बाद 3 से 4 घंटे तक अपनी बेटी के साथ 5 किलोमीटर दूर गांव-गांव जाकर बच्चों की पढ़ाई करवाई। ताकि बच्चे पढ़ाई से वंचित न रहें।
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from KAPS Krishna Pandit

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