पीएमएआई स्कीम के तहत राशि जारी करने की पावर नप से डीसी को स्थानांतरित होने पर पात्रों को राशि जारी नहीं हो पा रही हैं। सहायता राशि न मिलने पर शहर में अनेक परिवार अपना मकान तोड़कर किराए पर रहने को मजबूर हो रहे हैं। 3811 लाभ पात्रों में से अभी तक केवल 29 लोगों को ही स्कीम का पूरा लाभ मिल पाया है, जबकि 3314 लोगों को स्कीम के तहत अभी तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
पीएमआईवाई स्कीम के तहत अब केवल नप अधिकारी लाभ पात्रों को राशि जारी नहीं कर सकते। अब डीसी की स्वीकृति के बाद ही पात्रों को राशि जारी हो सकेंगी। सरकार की तरफ से पत्र जारी कर निर्देश दिए गए है कि पीएमएवाई स्कीम के लाभ पात्रों को नप ईओ व डीसी की स्वीकृति के बाद ही राशि जारी होगी। डीसी योजना के चेयरमैन है। इसलिए उनकी स्वीकृति से ही राशि जारी हो सकेगी।
किसी अन्य सक्षम अधिकारी को नहीं दी डीडी पावर
नए आदेशों के तहत डीसी व नप ईओ के हस्ताक्षर के बाद ही लाभ पात्रों को राशि जारी हो सकती है लेकिन अभी तक डीसी ने एडीसी या अन्य किसी सक्षम अधिकारी को इस कार्य के लिए डीडी पावर नहीं दी और नप में ईओ का पद रिक्त होने के कारण चरखी दादरी नप के ईओ को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। चरखी दादरी नप ईओ 20 दिन से कार्यालय में नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि उनके कार्यालय के कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव आने से वे होम क्वारंटाइन है।
नप चेयरमैन से सीधी बात
- नप अभी तक स्कीम के लाभपात्रों को राशि जारी क्यों नहीं कर पाई।
- चेयरमैन रणसिंह यादव ने बताया कि स्कीम के तहत पहले नक्शा व अन्य शर्तें लगी हुई थी। जिससे अधिकतर लोग पूरा नहीं कर पा रहे थे। उसके कारण उनकी राशि जारी नहीं हो पाई। नक्शे व अन्य शर्तें हटने के बाद लोगों ने जरूरी कागजात नप में जमा करवाए और नप ने राशि भी जारी की।
- कितने लोगों को अभी तक राशि जारी की गई।
- चेयरमैन ने कहा अभी तक 497
- लोगों को योजना का लाभ दिया जा चुका है।
- पिछले चार महीनों से किश्त जारी क्यों नहीं हो पा रही है।
- चेयरमैन ने बताया नप में ईओ का
- पद रिक्त है और चरखी दादरी के ईओ को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। ईओ होम क्वारंटाइन पर है। इसलिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
ये कहना है पात्रों का
पतराम गेट क्षेत्र निवासी सांवरमल व सूरजमल ने बताया कि उन्हें योजना के तहत दो-दो किश्त मिल चुकी हैं लेकिन तीसरी किश्त न मिलने के कारण मकान पर छत नहीं डाली जा रही है। इसलिए वे परिवार समेत किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। 20 से अधिक बार वे तीसरी किश्त के लिए नप में चक्कर लगा चुके हैं लेकिन अधिकतर समय काेई अधिकारी नहीं मिलता। जब मिलता है तो जल्द जारी करने का आश्वासन मिलता है।
रवि कुमार ने पहली किश्त की आस में पुराना मकान तोड़कर निर्माण कार्य शुरू किया और मकान की नींव तैयार की लेकिन उन्हें पहली किश्त ही जारी नहीं हो पाई। वह परिवार समेत किराये पर रहता है।
राजेश ने भी पुराना मकान तोड़कर निर्माण कार्य शुरू किया था। पहली ही किश्त जारी नहीं हुई है। वह चार महीनों से किराये के मकान में रहने को मजबूर है।
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from KAPS Krishna Pandit

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