अनलॉक 4 के तहत जिला डिपो की 65 रोडवेज बसें 115 रूटों पर दौड़ने लगी हैं, जबकि 75 बसें निर्धारित रूटों पर नहीं उतारी गई हैं। जिससे बसों में यात्रियों की भीड़ रहती है।
वहीं संचालित बसों में रोजाना करीब 10 हजार यात्री सफर करते हैं, जिससे डिपो की प्रतिदिन बुकिंग 7 लाख रुपये तक पहुंची है। जबकि लॉकडाउन से पहले यह बुकिंग 17 लाख रुपये आती थी। लेकिन अब साढ़े 3 महीनों रोडवेज को 2 करोड़ 97 लाख रुपये आमदनी हुई है।
जिसमें 70 लाख रुपये से ज्यादा का डीजल खपत हो गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने से बसों की आमदनी में इजाफा होने की उम्मीद है। कोरोना संक्रमण से बचाव में हुए लॉकडाउन के बाद बीती 1 मई को सिरसा से पंचकूला के लिए बस चलाई गई। जिसके बाद दिल्ली, रोहतक, गुड़गांव, हिसार, पानीपत के अलावा लोकल रूटों व राजस्थान के नोहर- भादरा, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ रूटों पर बसों को चलाया गया। लेकिन कोरोना के संक्रमण से बचाव में लोगों ने बसों में सफर करना मुनासिब नहीं समझा, तो कम यात्रियों के कारण बसों के टाइम मिस होते गए।
इसी कारण रोडवेज प्रशासन ने 75 बसें रूटों पर नहीं उतारीं हैं। 65 बसों को सिर्फ आमदनी वाले रूटों पर चलाया गया। संचालित बसें तीन महीनों में 15 लाख किलोमीटर सफर तक कर पाई हैं। जिसमें 2 करोड़ 97 लाख रुपये बुकिंग आई है। वहीं लगभग 70 लाख रुपये के डीजल की खपत होना बताया गया है। ऐसे में यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो बसों के समय को भी और बढ़ा दिया जाएगा।
कम सवारियों के बावजूद सभी बसें चलाने का है प्रयास
डिपो अधिकारियों ने बताया कि अंतरराज्यीय बसों की बुकिंग काफी कम है। इसके बावजूद काफी बसों के फेरे बहाल किए हैं। यात्रियों को बस में सफर करते हुए फेस मास्क लगाना अनिवार्य किया गया है। वहीं अंतरराज्यीय चलने वाली बसों में सफर करने वाले यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जाती है।
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from KAPS Krishna Pandit

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