दिल्ली-जोधपुर के लिए चली ट्रेन का महेंद्रगढ़ के आदर्श स्टेशन पर ठहराव न देकर रेलवे बोर्ड महेंद्रगढ़ क्षेत्र की जनता के साथ भेदभाव कर रहा है। पहले 230 ट्रेनों में एक भी ट्रेन नहीं अब 80 में मात्र एक ट्रेन मिली उसके ठहराव नहीं। दैनिक रेलयात्री महासंघ के सदस्यों ने सोमवार को महेंद्रगढ़ के लघु सचिवालय में डीसी आरके सिंह को प्रधानमंत्री, रेलवे बोर्ड चेयरमैन के नाम ज्ञापन देकर गाड़ी के ठहराव की मांग की है।
ज्ञापन में महासंघ के प्रधान रामनिवास पाटोदा ने बताया कि रेल मंत्रालय भी महेंद्रगढ़ क्षेत्र से कई वर्षों से भेदभावपूर्ण नीति अपनाता आ रहा है। रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों की तानाशाही से जनता और जनप्रतिनिधि दोनों परेशान हैं। सांसद द्वारा लिखे जाने वाले पत्रों तक को महत्व नहीं दिया जाता।
हरियाणा केन्द्रीय विवि, दूसरे राज्यों में व्यापारिक गतिविधियों, कर्मचारियों व सैनिकों के आवागमन को लेकर इस क्षेत्र से गुजरने वाली सभी गाड़ियों के स्टेशन पर ठहराव तथा लंबी दूरी की प्रतिदिन गाड़ी चलाना आवश्यक है।
ज्ञापन में इन तीन गाड़ियों के ठहराव की उठाई मांग
महेंद्रगढ़ स्टेशन पर तीन ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से क्षेत्र के यात्रियों में भारी रोष व्याप्त है। महासंघ के अध्यक्ष रामनिवास पाटोदा ने बताया कि दिल्ली-जोधपुर गाड़ी का पहले महेंद्रगढ़ स्टेशन पर ठहराव था परंतु अब 12 सितंबर से शुरू हो रही इस गाड़ी का ठहराव स्टेशन पर नहीं किया गया है।
दिल्ली-जोधपुर के बीच 17 स्टेशन है जिनमें से केवल महेंद्रगढ़ स्टेशन पर ठहराव न करना यहां के लचर प्रतिनिधित्व व भेदभावपूर्ण नीति को दर्शाता है। इसके अलावा सप्ताह में चार दिन चलने वाली हावड़ा सियालदह दुरंतो तथा सप्ताह में दो दिन चलने वाली हावड़ा से बाड़मेर गाड़ियों का ठहराव करने की मांग भी काफी पुरानी है परंतु रेल मंत्रालय के उच्चाधिकारी उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य के करीब सभी स्टेशनों पर इन गाड़ियों का ठहराव है क्योंकि दक्षिणी हरियाणा जयपुर जोन में आता है जिसका मुख्य कार्यालय जयपुर में हैं। इस कार्यालय में अधिकांश उच्चाधिकारी व कर्मचारी भी राजस्थान राज्य से ही हैं।
ऐसे में जो भी रेलवे के नए प्रपोजल, ठहराव नई ट्रेन चलाना इत्यादि सभी में राजस्थान को प्राथमिकता दी जाती रही है। उन्होंने कहा कि यदि एक माह के दौरान इन गाड़ियों के महेंद्रगढ़ के आदर्श स्टेशन पर ठहराव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र की जनता रेललाइन पर बैठक कर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी भारत सरकार व रेल मंत्रालय की होगी।
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from KAPS Krishna Pandit

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