काेराेना के चलते वर्क फ्राॅम हाेम का चलन बढ़ने से लाेग घराें में काम कर रहे हैं। यहां तक कि स्कूल बंद हाेने से बच्चे क्लासरूम की जगह घर के ड्राइंग रूम व बैडरूम में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यही वजह है कि अब लोगों में रीढ़ की हड्डी में दर्द, गर्दन व कमर दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या बढ़ रही है। फिजियोथेरेपिस्ट डाॅ. कंचन ने बताया कि लाॅकडाउन के बाद काम व पढ़ाई के तरीकाें में बदलाव आने से हेल्थ की समस्याएं भी आ रही हैं।
राेजाना 20 से 25 मरीज पीठ व गर्दन के दर्द की समस्या लेकर आ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण पाॅश्चर (बैठने का तरीका) ठीक न हाेना है। लैपटाॅप व माेबाइल पर काम करने से गर्दन में अकड़न आ जाती है, जिससे दर्द हाेने लगता है। वहीं फिजियोथेरेपिस्ट डाॅ. रजत लाेहान ने बताया कि लगभग 10 से 12 घंटे लैपटाॅप पर काम करने से पाॅश्चर में स्टेबिलिटी आ रही है। जिससे मसल्स स्पाॅजम हाे जाता है। इन दिनाें 70 प्रतिशत मरीज इस समस्या के हाेते हैं।
समय पर न संभले तो माइग्रेन हो सकता है
ज्यादा लंबे समय तक बैठकर माेबाइल व लैपटाॅप पर काम करने से चक्कर आना, कमर में दर्द, गर्दन दर्द, आंखाें का भारी हाेना आदि समस्याएं आ जाती है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए ताे यह समस्या आगे चलकर स्टूप पाॅश्चर (कूब निकलना) व माइग्रेन में भी बदल सकती है।
बैठे-बैठे गर्दन व बैक की स्ट्रेचिंग करते रहें
- ऑफिस वर्क करते समय घंटों एक ही पॉश्चर में बैठे रहते हैं। इसकी बजाय हर 40 मिनट बाद 4 से 5 मिनट की वॉक कर लें। इस दाैरान गर्दन व बैक की स्ट्रेचिंग भी करें।
- राेजाना सुबह 40 मिनट वाॅक करने की आदत डालें।
- दिन में 18-20 गिलास पानी जरूर पिएं।
- उठने व बैठने का तरीका सही हाेना चाहिए।
- लेटकर लैपटाॅप बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from KAPS Krishna Pandit

Please do not enter any spam link in the comment box.