जिले के 6 माइनिंग जोन में माइनिंग कंपनियां ज्यादा पत्थर निकालने के लालच में जमीन की गहराई तक ब्लॉस्ट कर चव्वा निकाल रही हैं। जिससे सभी 6 गांव के पहाड़ाें में चव्वे के पानी से तालाब बने हुए हैं।
वहीं माइनिंग विभाग अधिकारी भी बार-बार क्रेशर जोन का निरीक्षण करते रहते हैं लेकिन उन्हें अवैध खनन से निकला चव्वा दिखाई ही नहीं देता। जबकि क्रेशर जोन में कई जगहों पर चव्वे के कारण पूरे तालाब बने हुए हैं। माइनिंग कंपनी टेंडर से ज्यादा पत्थर तोड़कर उसे बेचकर अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। वहीं माइनिंग अधिकारी भी इनको अनदेखा कर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। चव्वे के कारण बने तालाब आम लोगों के लिए भी खतरनाक बने हुए हैं। जिनकी गहराई ज्यादा होने के कारण यहां अक्सर डूबने का खतरा बना रहता है।
अवैध खनन करने पर लीज को किया जाता है रद्द
अवैध खनन करते हुए कई बार माइनिंग कंपनी जमीन के काफी नीचे तक ब्लास्ट कर पत्थर निकाल लेती हैं। ताकि जितने पहाड़ की लीज है उससे नीचे तक खोदकर पत्थर ज्यादा निकाल कर बेचा जा सके। जबकि माइनिंग कंपनी चव्वे से 2 मीटर ऊपर तक ही खनन कर सकती हैं। ज्यादा गहराई तक ब्लास्ट करके चव्वा निकलने पर माइनिंग विभाग नोटिस जारी करता है। इसके बाद भी अगर दूसरी जगह चव्वा आता है तो मामला सीधे माइनिंग डायरेक्टर के पास पहुंच जाता है। जो माइनिंग कंपनी की लीज को उसी समय रद्द कर सकता है। लेकिन जिले के माई कलां, पिचौपा, अटेला, कलियाणा, खेड़ी बत्तर व मानकावास पहाड़ में कई जगहों पर ब्लास्टिंग कर अवैध खनन किया जा रहा है। मगर माइनिंग विभाग अधिकारी इन पर कार्रवाई करने की जगह अनदेखा कर रहे हैं।
ऐसे में तो पहाड़ खत्म होने के बाद यहां सिर्फ पानी ही पानी रह जाएगा
पहाड़ के नजदीक गांव के किसान विजयपाल व रविंद्र कुमार ने कहा कि अगर माइनिंग कंपनियां लगातार अवैध खनन कर चव्वा निकालती रही तो पहाड़ खत्म होने के बाद यहां सिर्फ पानी ही पानी रह जाएगा। चव्वा का पानी होने के कारण यह ऊपर नीचे भी होता रहता है। अगर अच्छी बारिश हो जाए तो यह चव्वा ऊपर आ जाएगा और तालाब से निकल कर आस पास के खेतों में उगी फसलों को भी नष्ट कर सकता है। अभी यह समस्या सिर्फ पहाड़ी क्षेत्र में है लेकिन जब पहाड़ खत्म हो जाएंगे तो किसानों के लिए आफत आ जाएगी। किसानों ने कहा कि माइनिंग अधिकारी को अवैध खनन पर रोक लगानी चाहिए।
पहाड़ की खुदाई से बने तालाब में डूबने से कलियाणा के युवक की हो चुकी मौत
माइनिंग कंपनी ने पहाड़ में ज्यादा गहराई तक ब्लास्टिंग कर चव्वा निकाल दिया। जिससे काफी दूर तक बड़ा तालाब बन गया। ज्यादा गहराई तक पत्थर निकालने कारण तालाब की गहराई का भी पता नहीं चल पाता है। ऐसे में लोगों ने इन्हें देशी स्वीमिंग पुल बनाया हुआ है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व गांव कलियाणा निवासी एक युवक की नहाते हुए डूबने से मौत हो गई थी। यह सब माइनिंग विभाग की लापरवाही के कारण ही हुआ था। जिन्होंने चव्वा निकालने से माइनिंग कंपनी को रोका ही नहीं।
पिचौपा व अटेला के पहाड़ में मिलता है महंगा सफेद रंग का पत्थर
कुछ क्रेशर संचालकों ने दबी जुबान से बताया कि अटेला व पिचौपा के पहाड़ में सफेद रंग का पत्थर है। सफेद रंग की बजरी मकान निर्माण में लिपाई करने में बेहतर मानी जाती है। इसलिए सफेद बजरी महंगी बेची जाती है। जिसका भाव 530 रुपये प्रति टन है। वहीं खेड़ी बत्तर, कलियाणा पहाड़ में लाल रंग का पत्थर है। जिसका भाव कम है और यह 480 रुपये प्रति टन मिल जाता है। सफेद रंग की बजरी ज्यादा महंगी होने के कारण माइनिंग कंपनी सफेद पत्थर को ज्यादा निकालने के लिए ही गहराई में ब्लास्ट कर अवैध खनन करती हैं। अवैध खनन के कारण ही पहाड़ में जगह जगह चव्वा निकला रहता है।
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from KAPS Krishna Pandit

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