पिछले साल के मुकाबले में हरियाणा बेटियों को बचाने में एक बार फिर नीचे आ गया है। स्वास्थ्य विभाग की अगस्त-2020 तक की लिंगानुपात की सामने आई रिपोर्ट में राज्य में एक हजार बेटों पर 914 बेटियाें ने जन्म लिया है। जबकि 2019 में बेटियों की संख्या 922 थी। हालांकि बात यदि पांच वर्षों की करें तो 2015 के मुकाबले में बेटियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के मुकाबले में 11 जिलों लिंगानुपात की रैंकिंग में नीचे आ गए हैं। जबकि नौ जिलों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। एक जिला रेवाड़ी में पिछले साल की अपेक्षा इस बार भी समान स्थिति पर बना हुआ है। फतेहाबाद जिला पिछले साल नौवें नंबर पर था, जो इस बार बेटियों को बचाने के मामले में एक नंबर पर आ गया है।
फतेहाबाद में पिछले साल एक हजार बेटों पर 922 बेटियों ने जन्म लिया था। जबकि इस आर अगस्त तक के आंकड़ों में यहां 942 बेटियों ने जन्म लिया है। जबकि पिछले साल का टॉपर जिला पंचकूला इस बार आठवें नंबर पर खिसक गया है। पंचकूला में 2019 में एक हजार बेटों के मुकाबले 963 बेटियां जन्मी।
जबकि इस बार संख्या 925 पर आ गई है। राज्य के 16 जिलों में एक हजार बेटों पर 900 से ज्यादा बेटियाें ने जन्म लिया। जबकि पिछली बार 20 जिलों ने यह आंकड़ा छूआ था। 2019 में चरखी दादरी को भिवानी में शामिल किया गया था। केवल भिवानी का ही आंकड़ा 900 से कम था। स्वास्थ्य विभाग के डीजी डॉ सूरजभान कंबोज का कहना है कि हर माह लिंगानुपात की रिपोर्ट तैयार होती है।
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from KAPS Krishna Pandit

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