भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश उत्सव गणपति प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा से आरंभ होती है। यह महोत्सव 22 अगस्त से शुरू होगा। लगातार 10 दिनों तक पूजा अर्चना कर गणपति बप्पा को विदाई की जाती है। कोरोना के चलते मूर्तिकारों को अभी तक बड़ी प्रतिमा बनाने का कोई ऑर्डर नहीं मिला है। आधे से ढाई-तीन फुट की मूर्तियां ही तैयार की जा रही हैं।
कोरोना वायरस का असर अब त्योहारों पर भी दिखाई देना शुरू हो गया है। विघ्नहर्ता के आगमन पर भी कोरोना ने विघ्न डाल दिया है। अबकी बार शहर में जगह-जगह भव्य बड़े पंडाल नहीं लग सकेंगे। कोरोना महामारी के कारण बप्पा की मूर्ति का आकार भी 14-15 फीट से घटकर 2 से 4 फीट तक ही रह गया है।
पीओपी की बजाय मिट्टी से बने गणेशजी की करें स्थापना
दैनिक भास्कर कई वर्षों से आप सभी पाठकों के साथ मिलकर ‘मिट्टी के गणेश’ अभियान चला रहा है। उद्देश्य सिर्फ यही है कि हम पीओपी की बजाय मिट्टी से बने गणेशजी की स्थापना करें। फिर घर पर ही उनका विसर्जन कर पवित्र मिट्टी को गमले में डालकर उसमें पौधा लगा दें। इस तरह उत्सव के बाद भी पौधे के रूप में उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ बना रहेगा। जलाशय भी दूषित होने से बचेंगे।
बीते साल थी सवा 8 फुट की प्रतिमा, इस बार ढाई फुट की
पिछले कई वर्षों से शिव सेवा समिति कृष्णा कॉलोनी की ओर से गणेशोत्सव पर बड़ा पंडाल लगाकर भव्य आयोजन होता था। समिति प्रधान पूर्णचंद आजाद ने बताया कि इस बार कार्यक्रम छोटा होगा। कृष्णा कॉलोनी मालगोदाम रोड के नजदीक सिद्धि विनायक पार्क में ढाई फुट की प्रतिमा स्थापित होगी जबकि बीते साल यहां सवा 8 फुट की प्रतिमा थी।
पहली बार नहीं मिले बड़ी मूर्तियों के ऑर्डर
घोसियान चौक क्षेत्र में कारीगर मनोज ने बताया कि कोरोना के चलते इस बार छोटी मूर्तियां ही ज्यादा बनाई हैं जो 100 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की हैं। कोरोना महामारी के कारण बप्पा की मूर्ति का आकार भी 14-15 फीट से घटकर 2 से 4 फीट तक ही रह गया है। ऐसा पहली बार है कि बड़ी मूर्तियों का ऑर्डर नहीं मिला।
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from KAPS Krishna Pandit

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