जिले में भादाे में मानसून अब मेहरबान होने लगा है, जबकि जून व जुलाई माह के दौरान मानसून ने खासा निराश किया। उम्मीद के मुताबिक भी बरसात नहीं हो सकी। लेकिन अब अगस्त माह में बरसात का सिलसिला बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों से बादल तो छा रहे थे, लेकिन शहर में बरसात नहीं थी। मंगलवार शाम से बने बारिश के माैसम से बुधवार सुबह 6 बजे से शाम तक दिनभर जिले में रुक-रुककर बारिश हुई। मंगलवार की अपेक्षा बुधवार काे बारिश के चलते अधिकतम पारा 2 डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया।
बुधवार को भिवानी शहर में 10 एमएम, लोहारू क्षेत्र में 10 एमएम बारिश हुई। जबकि ढिगावामंडी में 20 और ताेशाम में सर्वाधिक 40 एमएम व चांग में सबसे कम 2 एमएम बारिश हुई। बुधवार को शाम पांच बजे अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम पारा 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जबकि मंगलवार को दिन का तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम पारा 28.8 डिग्री सेल्सियस था। बुधवार काे दिन में हवा की रफ्तार 8 किलोमीटर प्रतिघंटा की रही, जबकि नमी की मात्रा 90 प्रतिशत दर्ज की गई। इन दिनाें सामान्यत: अधिकतम तापमान 33 डिग्री व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहता है जबकि गत वर्ष 19 अगस्त को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। तोशाम में बारिश से फिर जलभरावा हो गया।
मुरझाई फसलों को मिला जीवनदान, किसानों के चेहरे खिले
बरसात के अभाव में क्षेत्र के अधिकांश किसानों की फसलें सूखने के साथ-साथ रोग ग्रस्त होने लगी थी। जिन किसानों के पास पानी की व्यवस्था थी उन्होंने को अपनी फसल को पानी देकर जीवनदान दे दिया, परंतु जिनके पास पानी की सुविधा नहीं थी। उन किसानों के चेहरे अपनी फसलों को लेकर मुरझाए हुए थे। जिले में मंगलवार व बुधवार को अच्छी बरसात से जहां फसलों को जीवन दान मिला, वहीं किसानों के माथे पर छाई चिंता की लकीरें भी खुशी में बदल गई। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बरसात से खरीफ की फसल को पूरा लाभ मिलेगा।
बाजरे, कपास और सब्जियों की फसल में जमा न रहने दें पानी
चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी दिनों में मौसम परिवर्तनशील रहेगा। 22 अगस्त तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बरसात तथा ऊमस भी रहने का अनुमान है। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में गिरावट परंतु बाद में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी संभावित है। वहीं किसान खेतों में वर्षा के अतिरिक्त जल की निकासी का प्रबंध रखें। बाजरे, कपास व सब्जियों की फसल में पानी जमा न रहने दें। कीटनाशक व रसायनिक छिड़काव करते समय बदलते मौसम को ध्यान में रखें।
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from KAPS Krishna Pandit

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