जिले में मनरेगा से जुड़े विकास कार्यों को गति मिलेगी। जिला प्रशासन इस स्कीम पर तवज्जो देकर काम कर रहा है, ताकि लोगों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अधिक से अधिक परिवारों को रोजगार देकर उनकी आजीविका का साधन प्रशस्त किया जा सके। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।
इसी के चलते बुधवार को डीसी-सह-जिला परियोजना समन्वयक निशांत कुमार यादव ने लघु सचिवालय के सभागार में लाइन डिपार्टमेंट के साथ सम्मिलन किए गए मनरेगा के भिन्न-भिन्न विकास कार्यों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अब हर 15 दिन के बाद मनरेगा के विकास कार्यों की समीक्षा होगी, ताकि उन्हें दिए गए लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जा सके।
उन्होंने इंद्री व निसिंग खंड के सहायक खंड कार्यक्रम अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा के दौरान अगस्त तक लक्ष्य के फलस्वरूप 105 प्रतिशत से अधिक प्रगति दिखाने पर प्रशंसा पत्र जारी करने की बात कही। कुंजपुरा, मूनक, असंध व घरौंडा खंड के ऐसे अधिकारियों को अपेक्षाकृत प्रगति न दिखाने के लिए डीआरडीए के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर व मनरेगा इंचार्ज गौरव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा।
उन्होंने कहा कि मनरेगा एक ऐसी स्कीम है, जिसमें लोगों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने के साथ-साथ विकास कार्यों की एसेट को सुदृढ़ बनाना भी है। मनरेगा सरकार का फ्लैगशिप कार्यक्रम है। हरियाणा में दूसरे प्रदेशों की अपेक्षा सर्वाधिक मजदूरी दी जाती है।
लाइन डिपार्टमेंट को दिए गए विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों से कहा कि पंचायत विभाग मनरेगा का नोडल विभाग है। गांवों में रोजगार की जरूरत वाले परिवारों की पहचान कर अधिक से अधिक मानव दिवस सृजित किए जाएं। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी सरोज बाला को उन्होंने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ियाें में मरम्मत के जो काम अधूरे हैं, उन्हें पूरा करवाएं। जिला वन अधिकारी नरेश रंगा से कहा कि वे नर्सरियों की संख्या बढ़ाएं, ताकि उनमें तैयार किए गए पौधों को पंचायतों को दिया जा सके। इससे पौधरोपण का लक्ष्य भी पूरा होगा और पर्यावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सीईओ गौरव कुमार ने डीसी को बताया कि अगस्त तक जिले में मनरेगा के तहत 9 लाख 63 हजार मानव दिवस सृजित करने के फलस्वरूप 9 लाख 25 हजार समीक्षा बैठक में एडीसी अशोक कुमार बंसल के अतिरिक्त सभी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी तथा जिला शिक्षा अधिकारी भी उपस्थित रहे।
जिले में 4400 कैटल शेड बनाए जाने हैं
समीक्षा बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति व सीमांत किसानों के लिए कैटल शेड बनवाने के लिए उपायुक्त ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन कार्यों के लिए मैटिरियल उपलब्ध करवाएं और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों से कहा कि वे मैटिरियल का भुगतान करवाएं। जिले में इस तरह के 4400 कैटल शेड बनाए जाने हैं। प्रत्येक खंड में 550 का लक्ष्य है, जिसमें 10 गुना 12 साइज का शेड बनेगा। उन्होंने कहा कि गांवों में पात्र व्यक्तियों की पहचान कर इस काम को आगे बढ़ाएं, जिन खंडाें में ज्यादा लाभ पात्र मिलें, वहा ज्यादा कैटल शेड बनवाए जाएं।
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from KAPS Krishna Pandit

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