उत्तरी भारत का सबसे बड़ा व पुराना वामन द्वादशी मेला शनिवार सुबह 7 बजे से अम्बाला सिटी में होगा। 120 साल के उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक यह पहला मौका होगा जब मेला एक ही दिन में सिमट जाएगा। कोरोना संक्रमण के वजह से यह बदलाव हुआ है। मेला संचालन करने वाली सनातन धर्म सभा अम्बाला सिटी के जनरल सेक्रेटरी विनाेद गर्ग ने बताया कि सुबह 11 बजे से तंदूरा बाजार में पुरानी अनाज मंडी में 5 मंदिरों के हिंडोले स्थापित हो जाएंगे।
वामन भगवान के दर्शन मास्क पहनकर व सोशल डिस्टेसिंग के साथ हाेंगे। बता दें कि पिछले साल तक पहले तक जुलूस की शक्ल में हिंडोले अनाज मंडी पंडाल में स्थापित होते थे। दूसरे दिन शाम को जबरदस्त आतिशबाजी होती थी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। तीसरे दिन बैंड प्रतियोगिता होती थी, जिसमें कई राज्यों से टीमें आती थी। देर रात हिंडोलों को नौरंगराय तालाब में नौका विहार कराया जाता था।
एक दिन में सिमटेगा वामन द्वादशी मेला, सुबह 11 बजे से पुरानी अनाज मंडी में हिंडोले के दर्शन
- बिना मास्क के भक्तजन काे दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे। एक समय में दाे लाेगाें काे ही दर्शन करने दिए जाएंगे।
- सेनिटाइजेशन व थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही भक्तों काे अंदर अाने की अनुमति हाेगी।
- किसी काे बुखार हुआ ताे पंडाल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
- 12 सेवादार थर्मल स्क्रीनिंग, सेनिटाइजेशन व हर श्रद्धालु का नाम व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज करने की ड्यूटी करेंगे।
- पंजीरी का प्रसाद व चरणामृत नहीं मिलेगा।
- रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों व धर्मशालाओं जैसे रामबाग मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, हनुमान मंदिर, गेंदामल व शांतिमल धर्मशाला में हिंडोले की आरती नहीं हाेगी।
शाम 6:30 बजे जलाभिषेक
- सुबह 7 बजे पुरानी अनाज मंडी में हवन होगा
- 9 बजे बड़े ठाकुरद्वारा से हिंडोला निकलेगा
- 11 बजे से 5 मंदिरों के हिंडोले मंडी में स्थापित हो जाएंगे
- शाम 4 बजे तक लाेग दर्शन कर सकेंगे
- 5 बजे बाजारों से निकलेंगे
- 6.30 बजे नौरंग राय तालाब हिंडोलों के बेड़े में तैराने की बजाय सिर्फ गंगाजल से अभिषेक होगा और फिर वापस मंदिरों में स्थापित होंगे
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from KAPS Krishna Pandit

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