खेतों में पानी लगाने के लिए सीवरेज के मैनहॉल में उतरे किसान की बॉडी 10वें दिन मिल गई। शव को पाेस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा है। सेना और एनडीआरएफ की टीम ने 9 दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन सफलता नहीं मिल। 10वें दिन जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के सहयोग से अभियान चलाया गया था। घटनास्थल से 300 मीटर की दूरी पर पाइपलाइन में किसान गाद में दबा मिला। देसी जुगाड़ के सहारे निकाल लिया गया।
गांव नटार में किसान मैनहोल में पाइपें डालकर पंप की सहायता से सीवरेज का पानी निकालकर खेतों में सिंचाई करते हैं। 12 अगस्त को गांव नटार के एंट्री प्वाइंट पर स्थित सीवरेज के मैनहोल से पानी निकालने के प्रयास में दो किसान पूर्ण चंद व काली गिर गए थे। हालांकि किसान पूर्ण चंद को तो ग्रामीणों ने कुछ ही समय में बेहोशी की हालत में निकाल लिया था। जिसकी बाद में उपचार के बाद मौत हो गई। दूसरा किसान काली लापता हो गया था।
जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर किसान को ढूंढने के लिए सर्च आपरेशन चलाया। पहले 9 दिन के दौरान सेना से लेकर एनडीआरएफ की टीम ने ढूंढा। अलग-अलग ट्रिक अपनाई गई, केरल से मंगवाई गई 51 लाख रुपये की मशीन भी काम नहीं आई। गुरुवार शाम को एनडीआरएफ की टीम वापस लौट गई। अब शुक्रवार से ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों और ठेकेदारों के कारिदों के साथ मिलकर अभियान शुरू किया था।
पहले ही दिन शाम करीब 5 बजे लापता किसान की बॉडी निकाल ली गई। तहसीलदार श्रीनिवास ने बताया कि शुक्रवार को सीवरेज में गिरे लापता किसान की बॉडी मिल गई है। ग्रामीणों और जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ ठेकेदारों का भी सहयोग सफल रहा। उन्होंने बताया कि अब पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
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from KAPS Krishna Pandit

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