(पवन पासी) अमेरिका में डॉलर कमाने के सपने लेकर गए युवाओं ने ख्याल में भी न सोचा होगा कि इस सफर में उनकी लड़ाई जिंदा रहने की जद्दोजहद तक सिमट जाएगी। पनामा के जंगलों में अपने साथ गए युवाओं की सड़ती लाशें देखनी पड़ी। शाकाहारी लोगों को गाय-भैंस व सूअर का मांस खाना पड़ा और प्यास बुझाने के लिए कीचड़ निचोड़ कर पीना पड़ेगा। एजेंटों के जाल में फंसकर अवैध एंट्री करने वाले इन युवाओं ने न केवल यह सब झेला बल्कि मानव तस्करी से जुड़े माफिया की गोलाबारी के बीच से भी गुजरे।
बराड़ा के जलूबी से गए 24 वर्षीय अमित कुमार ने अपनी आपबीती साझा करते बताया कि वह मुंबई से एक दिन में ही इकवाडोर पहुंच गया था लेकिन मैक्सिको में अमेरिका के बाॅर्डर तक पहुंचने में साढ़े पांच महीने लग गए थे। जेलाें व कैंपाें में रहते हुए वजन 70 किलो से घटकर 50 किलो रह गया था। 8 जनवरी 2019 को एजेंट किरण की लड़की सुमनप्रीत कौर उसे अपने साथ इक्वाडोर लेकर गई थी। सुमनप्रीत कौर उससे पहली बार मिली थी लेकिन उसने पता नहीं कैसे मेरे साथ शादी का मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लिया था। उसे पहली बार इकवाडोर में एंट्री नहीं मिली थी लेकिन सुमनप्रीत के पास वहां का वर्क परमिट होने से उसे एंट्री मिल गई थी।
इक्वाडोर से उसे कोलंबिया देश में ले जाया गया। कोलंबिया से पनामा टैक्सी में गए वहां पर आगे डोंकर मिला जो पनामा से जंगलों में बीच रास्ते छोड़ आया था। जंगल में माफिया के बीच फायरिंग हुई। उनके बैच में एक गुजरात का लड़का था जिसकी इस फायरिंग में मौत हो गई। पीछे से आए दूसरे बैच के लोगों ने बताया कि उस युवक की लाश को कीड़े खा रहे थे। हालात ऐसे थे कि हर किसी को अपनी जान की पड़ी हुई थी। उनके पैरों में छाले पड़ गए और पीने का पानी तक नहीं था। एक दिन तो उसे जंगल का कीचड़ निचोड़ कर पानी पीना पड़ा। पांच छह दिन पैदल चलने के बाद जब करीब 30 लोगों का उनका बैच पनामा कैंप में पहुंचा तो वहां माफिया ने उनके पूरे कपड़े उतरवा लिए। पैसा-मोबाइल व बिस्किट सब छीन लिया और पुराने कपड़े फेंक गए। इन कैंप में गाय-भैंस व सूअर का मांस मिलता था। घरवालाें ने कर्ज लेकर भेजा था, इसलिए पीछे मुड़ नहीं सकते थे।
उसने खुद 15 लाख दिए थे जबकि घर में तो दो लाख ही थे। तीन भाई बहनों में बड़ा था और चाहता था कि उनके सपने पूरे कर पाऊं। मैक्सिको के तेजवाना बाॅर्डर को जब क्रॉस किया तो वहां अमेरिका आर्मी ने कुछ देर में ही पकड़ लिया। पुलिस चौकी के एक कमरे में 21 दिन बंद रखा और वहां बिस्किट का पैकेट व एक फ्रूटी जैसा पैक देते थे। इसके बाद जेल में छह से सात महीने रहा तो वहां दिन में उबली गाजर व सोयाबीन के उबले टुकड़े व दो ब्रेड मिलते था। एक मुट्ठी चावल व पानी वाला राजमा मिलता था। ऐसे हालात थे कि न तो आदमी मर सकता था और न जी सकता था। उसे 1 जून को अमेरिका से अमृतसर डिपोर्ट कर दिया गया। अब उसे ऐसा लग रहा है उसका नया जन्म हुआ है। यही बात घर वालों को भी कही कि वह दूसरा जन्म लेकर आया है। वहां मर जाते ताे घरवालों को लाश तक नसीब नहीं होती। अब यहीं नमक से ही खाना खा लेंगे लेकिन अवैध तौर पर दोबारा नहीं जाएंगे। ये पता होता था कि जान दांव पर लगानी पड़ेगी। एजेंट कहते कुछ और हैं और होता कुछ और है।
डाेंकर के एरिया बंटे, दूसरे में घुसने पर फायरिंग कर दी, डोंकर पहाड़ पर छोड़कर भाग गया
अम्बाला सिटी के युवक सुरिंद्र पाल सिंह के मुताबिक उसने बकनौर के एजेंट कप्तान सिंह को अमेरिका भिजवाने की एवज में 14 लाख रुपए दिए थे। जब वे मैक्सिको क्रॉस कर रहे थे तब माफिया ने उनके डोंकर पर गोली चला दी थी। डोंकर गाड़ी छोड़कर भाग निकला। गाड़ी की हेंड ब्रेक नहीं लगाई थी और गियर में गाड़ी बंद करके भागा था तो गाड़ी पहाड़ से गिरने से बची। डाेंकर का अपना-अपना एरिया तय किया हुआ है। यह डोंकर उन्हें दूसरे डोंकर का एरिया पार करा रहा था। बाद में दूसरे डोंकर ने पैसा लेकर जाने दिया था।
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