समाज में थर्ड जेंडर काे पहचान देने वाली सेलिब्रिटी ट्रांसजेंडर एमएक्स धनंजय चौहान शनिवार काे पीकेआर जैन वाटिका स्कूल इग्नाइट एंड इंस्पायर लाइव सेशन के जरिए स्टूडेंट्स से रूबरू हुईं। इस दाैरान उन्हाेनें स्टूडेंट्स व ऑनलाइन सेशन में उपस्थित लाेगाें काे अपनी लाइफ जर्नी के बारे में बताया। उन्हाेंने बताया कि बचपन में परिवार द्वारा लड़का बने रहने का दबाव, समाज के द्वारा घृणा की प्रताड़ना, स्कूल और कॉलेज में बच्चों और अध्यापकों द्वारा उपहास व समाज द्वारा मिले शाेषण ने उन्हें दुख ताे दिए लेकिन यही दुख जिंदगी में कुछ अलग करने के लिए प्रेरणा भी बने।
प्रिंसिपल उमा शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि समय की मांग है कि हम ट्रांसजेंडर का सम्मान करें और उनको आगे बढ़ने में सहयाेग करें। धनंजय चौहान हम सबके लिए एक प्रेरणास्रोत हैं जिन्होंने मुश्किलाें में भी हार नहीं मानी।
जब पीयू में हुई रैगिंग
गवर्नमेंट काॅलेज से बीए ऑनर्स करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से 1993 में एमए हिस्ट्री करने गई ताे उनके साथ रैगिंग हाेने लगी। वे वहां से भाग आई। दाेबारा 1994 में लाॅ करने के लिए इवनिंग सेशन में एडमिशन लिया। एक महीने तक सब ठीक चला लेकिन एक दिन रात काे उनके साथ रैगिंग की काेशिश हुई। उसके बाद यूनिवर्सिटी न जाकर सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया। कंप्यूटर काेर्स किया। फ्रेंच और रशियन लेंग्वेज सीखी। खुद काे जानने के लिए कि आखिर मैं हूं काैन कई उपनिषद, वेद और लिटरेचर पढ़े।
उन हादसों ने बना दिया मजबूत
धनजंय काे कई बार झूठे केसाें में फंसाया गया। साल 2000 में नाै महीने जेल में भी रहना पड़ा। सीबीआई जांच से भी कई बार गुजरना पड़ा। तब धनंजय काे लगा कि अब मुझे खुद काे मजबूत करना पड़ा। विचार आया कि हिजड़ा कम्यूनिटी में चली जाऊं लेकिन नहीं क्योंकि अगर वहां जाना हाेता ताे बचपन में ही चली जाती। इसलिए उन्हाेंने 2009 में फ्रेंड के साथ मिलकर सक्षम ट्रस्ट बनाया जिसमें वे ट्रांसजेडर के लिए काम करने लगी। नेशनल लेवल पर टाॅक प्राेग्राम करने लगे। उन्हाेंने 2013 में गर्भ-उत्सव अपने हाेने की खुशी मनाना शुरू किया जिसे पंजाब यूनिवर्सिटी से शुरू किया।
यह उत्सव हर साल 22 मार्च काे 7 दिन के लिए मनाया जाता है जिसमें क्विज, कंपीटिशन, डांस प्राेग्राम करवाते हैं। 2014 में थर्ड जेंडर काे पहचान दिलाने के लिए वे पीएल का हिस्सा रहीं। सुप्रीम काेर्ट ने 2015 में थर्ड जेंडर काे माना। धनंजय ने उस दाैरान बताैर थर्ड जेंडर खुद की पहचान दिखाई और पहली बार अपनी पहचान के साथ 2019 में वाेट भी डाला।
धनंजय ने साल 2016 में दाेबारा लिया एडमिशन
धनंजय चौहान ने 2016 में मास्टर इन ह्यूमन राइट्स एंड डयूटी में एडमिशन लिया। उस दाैरान धनंजय ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में ट्रांसजेंडर के लिए अलग शौचालय बनवाए, उनकी शिक्षा के लिए फीस माफी तथा अन्य कई प्रोजेक्ट किया। अब वे ट्रांसजेडर वेल्फेयर बाेर्ड के नाॅन आफिशियल मेंबर भी हैं।
उन्हाेंने साेशल वर्क में भी एमए की है। आगे वे पीएचडी करना चाहती हैं। अब वे स्कूल, काॅलेज, यूनिवर्सिटी व कैनेडियन एंबेसी आदि में सेमिनार व अवेयरनेस कैंपेन भी समय-समय पर लगाती रहती हैं और अभिभावकाें व लाेगाें काे जागरूक करती हैं कि बच्चा जैसा भी है उसे अपने पास घर में ही रखकर उसकी परवरिश करें। वाे जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार करें। वाे अलग नहीं है वाे भी समाज का एक हिस्सा है जिसे कुदरत ने बनाया है।
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