कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों को खोला जाए या नहीं इसके लिए बारे में विचार विमर्श करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी रामअवतार शर्मा की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी खंडों के बीईओ, अध्यापक यूनियनों के प्रतिनिधि, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन सदस्य, प्रिंसिपल व मुख्यध्यापकों ने हिस्सा लिया। बैठक में 14 एंजेडों पर विचार विमर्श किया गया। विचार विमर्श के बाद यह फैसला किया गया कि अभी स्थिति सामान्य होने तक स्कूलों को न खोला जाए।
कोरोना महामारी के बढ़ रहे प्रकोप को देखते हुए शिक्षा विभाग ने जिले में अभी स्कूल नहीं खोलने का फैसला किया है। क्योंकि जिले में लगातार कोरोना पाॅजिटिव केसों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में प्रत्येक बच्चे का कोविड 19 का टेस्ट करना संभव नहीं है। ऐसे में स्कूलों में अगर एक बच्चा भी संक्रमित आता है तो व संक्रमण को फैला सकता है। जिसको ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों व प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्यों ने अभी स्थिति सामान्य नहीं होने तक स्कूल नहीं खोलने का फैसला किया गया हैं।
बैठक में इन एजेंटों पर हुई सहमति : शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित बैठक में निर्णय किया गया कि प्रथम चरण में केवल 9वीं से 12वीं की कक्षाओं को अनुकूल परिस्थितियों में ही लगाई जानी चाहिए।
इस बारे में अगस्त में आकलन हो। शेष कक्षाओं के लिए अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में स्थिति का आकलन कर निर्णय लिया जाएं। यदि परिस्थितियां अनुकूल होती है तो सितंबर 2020 में कक्षा पांचवी से 7वीं पर निर्णय लिया जा सकता है। स्कूल खुलने की स्थिति में प्रत्येक विद्यार्थी व अध्यापक की कोविड 19 का टेस्ट करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण सभी स्कूलों में बच्चों में थर्मल स्क्रीनिंग की जाएं। ताकि सभी बच्चों व अध्यापकों के स्वास्थ्य की जांच हो सके।
छात्र संख्या व विद्यालय में उपलब्ध स्थान के अनुसार छात्रों की उपस्थिति का निर्णय लिया जाएं।
अगर छात्र संख्या कम है व पर्याप्त स्थान उपलब्ध है तो सभी छात्रों को बुलाया जा सकता हैं। अधिक संख्या की स्थिति में ऑड इवन का नियम व शिफ्टाें के माध्यम से छात्रों को बुलाया जा सकता है। प्राथमिक व पूर्ण प्राथमिक कक्षाओं को स्थिति पूर्णता ठीक होने के बाद ही बुलाने की सहमति हुई है।
विद्यालय खुलने पर वर्ष की शेष अवधि के अनुसार पाठ्यक्रम के केवल महत्वपूर्ण भाग को शामिल किया जाए व कम महत्वपूर्ण भाग को छोड़ दिया जाए। ताकि छात्रों को मानसिक तनाव से बचाया जा सके। सभी विद्यालयों में कक्षाएं सुचारू नहीं होने तक ई लर्निंग से पढ़ाई जारी रखने पर सहमति हुई है।
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