1.75 करोड़ की स्ट्रीट लाइट फिर से खरीदने जा रहा था नगर निगम, यूएलबी ने रोक लगाई
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1.75 करोड़ की स्ट्रीट लाइट फिर से खरीदने जा रहा था नगर निगम, यूएलबी ने रोक लगाई

स्ट्रीट लाइट घोटाले संबंधी तीन एमबी (मेजरमेंट बुक) जमा नहीं कराने पर नगर निगम ने तत्कालीन जेई भूपेंद्र के खिलाफ सिटी थाना में एफआईआर दर्ज करने की शिकायत दी है। 9 जून को निगम कमिश्नर ओम प्रकाश को शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) के निदेशक अमित अग्रवाल को स्ट्रीट लाइट संबंधी रिपोर्ट देनी थी। इससे एक दिन पहले 8 जून को ही भूपेंद्र के खिलाफ थाने में शिकायत दी गई। कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में निदेशक को बताया भी कि नोटिस के बाद भी भूपेंद्र ने तीन एमबी जमा नहीं कराई।

इस बारे में नगर निगम के एसई महीपाल सिंह ने बताया कि नोटिस के बाद भी भूपेंद्र ने 3 एमबी जमा नहीं कराई। इसमें स्ट्रीट लाइट संबंधी जानकारियां हैं। इसलिए, 8 जून को सिटी थाना में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की शिकायत दी है।

पिछले साल हाउस मीटिंग में रखी थी रिपोर्ट, सिफारिश के 6 महीने के बाद जागा निगम
नगर निगम में किस तरह से काम चल रहा है, यह उसका उदाहरण है कि पार्षद दुष्यंत भट्‌ट की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 16 दिसंबर को नगर निगम हाउस की मीटिंग में स्ट्रीट लाइट संबंधी जांच रिपोर्ट रखी थी। इसमें बताया था कि जेई भूपेंद्र ने रिपोर्ट नहीं दी। इस पर निगम हाउस ने भूपेंद्र पर केस दर्ज करने और निलंबित करने की शिकायत की। निगम ने जेई पर कोई कार्रवाई नहीं। बल्कि वह तो पदोन्नत होकर एमई बन गया और आजकल चरखी-दादरी में है।

1.75 करोड़ की स्ट्रीट लाइट खरीदने के लिए टेंडर जारी कर चुका निगम
नगर निगम 1.75 करोड़ रुपए की करीब 9000 एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीदने जा रहा था। इसके लिए टेंडर जारी कर चुका है। 16 जून को टेंडर खुलने भी वाले थे कि यूएलबी के महानिदेशक ने स्ट्रीट लाइट की खरीद पर रोक लगा दी। साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि अगर कहीं टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो उसे तुरंत रद करें।

10 साल की मेंटीनेंस वाला नियम तय कर रहा यूएलबी
डीसी और नगर निगम कमिश्नर को भेजे पत्र में महानिदेशक ने कहा है कि स्ट्रीट लाइट संबंधी एक नियम बनाया जा रहा है। जिसमें 10 साल के लिए ऑपरेशन और मेंटीनेंस की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीसीएमएस) बनाया जा रहा है।

कमिश्नर को सरकार ने नौकरी से रिलीव किया, 31 जुलाई तक के लिए फिर से नियुक्ति दी थी
प्रदेश सरकार ने नगर निगम के कमिश्नर ओम प्रकाश को नौकरी से रिलीव कर दिया है। मतलब कि सरकार ने 31 जनवरी 2020 को जो फिर से 6 माह के लिए नियुक्ति दी थी, वह समाप्त कर दी। सरकार के मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने मंगलवार 9 जून को ही ओम प्रकाश को पदमुक्त कर दिया था। बुधवार को ऑर्डर जारी हुआ। 31 जनवरी 2020 को ही नगर निगम के कमिश्नर ओम प्रकाश रिटायर्ड हो गए थे। लेकिन सरकार ने फिर से नियुक्ति दे दी थी। इसे पूरा होने में एक माह 20 दिन बचे थे। अब स्ट्रीट लाइट घोटाले में कार्रवाई नहीं होने पर ओम प्रकाश को नौकरी से पदमुक्त कर दिया।



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Municipal Corporation was going to buy 1.75 crore street light again, ULB bans


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