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लखनऊ | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मंत्री विनोद सोनकर ने भाजपा से इस्तीफे देकर इधर-उधर जाने वाले मंत्री और विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि 5 साल सरकार में रहने के बाद जो लोग अब पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं, दरअसल उनको पिछड़ों और दलितों की नहीं बल्कि अपने और परिवार के विकास की चिंता है। कौशाम्बी सांसद भाजपा सांसद और भाजपा चुनाव अभियान समिति के सदस्य विनोद सोनकर ने गुरूवार को कहा कि पांच साल सरकार में रहने के बाद जो लोग अब पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं, दरअसल उनको पिछड़ों और दलितों की नहीं बल्कि अपने और परिवार के विकास की चिंता है। पिछड़ों,दलितों के नाम पर राजनीतिक सौदेबाजी कर रहे हैं। ऐसे लोग किसी समाज के नहीं हो सकते हैं। दलित और पिछड़े समुदाय के लोग सब देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दलितों और पिछड़ों के हित में सबसे ज्यादा काम भाजपा सरकार में हुआ है। सोशितों,वंचितों को सम्मान से जीने का हक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी ने दिलाया। दलितों को आर्थिक रूप से मजबूत किया। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया। प्रतिनिधित्व देकर राजनीति में पिछड़ों की भागीदारी को मजबूत किया।
विनोद सोनकर ने कहा कि वर्षों तक देश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस और सिर्फ एक परिवार का विकास करने वाली समाजवादी पार्टी ने दलितों,पिछड़ों और वंचितों का शोषण किया है। अखिलेश यादव केवल एक जाति के नेता हैं। उनकी नजर में सिर्फ एक जाति का विकास ही पिछड़ों का विकास है। भ्रष्टाचार में डूबे अखिलेश और उनके कुनबे को चुनाव में ही पिछड़े और दलितों की याद आती है।
भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ने कहा, "सरकार में रहते हुए अखिलेश ने मुख्तार और अतीक जैसे माफियाओं के जरिये पिछड़ों और दलितों की जमीनों पर कब्जे करवाए थे। दलित और पिछड़े समाज के लोग भूले नहीं हैं जब अखिलेश सरकार में पिछड़ों की आबादी के बीच जबरन एक संप्रदाय विशेष के धार्मिक स्थल बनाये जाते थे।"
पार्टी का बड़ा दलित चेहरा माने जाने वाले सोनकर ने कहा कि "भाजपा सरकार बनने के बाद पिछड़ों और दलितों को संरक्षण मिला। राशन वितरण से लेकर मुआवजे,पेंशन और किसान सम्मान निधि की राशि सीधे उनके खातों में पहुंच रही है। हर गरीब और सोशित को सरकार सहारा दे रही है। कोरोना काल में सरकार ने न सिर्फ मुफ्त इलाज कराया बल्कि उनके खातों में पैसे भेजे और घर तक भोजन पहुंचाया।" ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी में अभी तक दो कैबिनेट मंत्री तकरीबन एक दर्जन विधायक इस्तीफा दे चुके हैं।
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