हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने कहा है कि कोरोना फैलाव के मद्देनजर पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश जरूरी है। क्योंकि वातावरण दूषित होने से अनेक तरह की श्वास संबंधी बीमारियों के फैलने की संभावना रहती है, इससे कोरोना संक्रमण फैलने का भी अंदेशा बढ़ सकता है। हम सभी का दायित्व बनता है कि वायु प्रदूषण न हो इसके लिए ग्रामीणों को जागरूक करें और पर्यावरण प्रदूषण रोकने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। इसमें कृषि विभाग के साथ-साथ सभी विभाग किसानों को जागरूक करने में सहयोग करें।
फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में पिछले वर्ष हरियाणा में अच्छा कार्य हुआ था। हरसैक के उपग्रही चित्रों व रिपोर्ट के अनुसार पूर्व के वर्षों के मुकाबले गत वर्ष फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं में 68 प्रतिशत की कमी आई थी। इस बार हमें इससे भी आगे बढ़कर जीरो बर्निंग के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करना है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर योजना तैयार की जाए। लाल और पीले जोन में आने वाले जिन गांवों में कस्टमर हायरिंग सेंटर नहीं हैं। जिन से अभी तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं, वहां से जल्द से जल्द आवेदन कराए जाएं। उन्होंने पंचायतों के पदाधिकारियों को छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर पंचायती स्तर पर स्थापित 851 कस्टम हायरिंग केंद्रों में दिए जाने वाले उपकरण व फसल अवशेषों के भंडारण पंचायत भूमि पर किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ग्राम सभा की होंगी बैठकें
पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए ग्राम सभा की बैठकें आयोजित करने के लिए भी कहा। पराली जलाने वाले रेड जोन को विशेष रूप से फोकस किया जाए। योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए। पराली जलाने की घटनाएं न हों, इसके लिए निगरानी टीमों का गठन किया जाए।
नौ प्रकार के कृषि यंत्र मिलेंगे
फसल अवशेष प्रबंधन के 9 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। वर्ष 2020-21 के लिए 820 कस्टमर हायरिंग सेंटर व 2741 व्यक्तिगत उपकरण दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए गए हैं।
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from KAPS Krishna Pandit

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