कोरोनाकाल में लॉकडाउन होने की वजह से शिक्षण संस्थान पिछले 4 माह से भी ज्यादा समय से बंद चल रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र विकल्प ऑनलाइन ही रह गया है। लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई चलने और गेम आदि भी ऑनलाइन खेलने से बच्चों की दूसरी खेल आदि सामान्य गतिविधियां कम हो गईं। जिससे उनमें जल्दी गुस्सा आने और चिड़चिड़ापन जैसी शिकायतें भी तेजी से बढ़ी है। ऐसा इसलिए भी कि आउटडोर एक्टिविटी कम होने से बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर ही बीत रहा है। नागरिक अस्पताल की मनोचिकित्सक ओपीडी में आने वाले बच्चों की काउंसलिंग में भी यहीं निष्कर्ष निकला है कि उनके ऑनलाइन कक्षाओं में समझ नहीं आता है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 3-4 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ इस तरह की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
घर में बनाएं पढ़ाई के लिए एक नियत जगह
डॉक्टर के अनुसार बच्चों को पढ़ाई के लिए घर में एक नियत जगह बनानी चाहिए। साथ ही पढ़ाई का भी पूरा शेड्यूल बनाएं। सुबह कक्षा से पहले नहाना चाहिए। फिर घर में बनाए नियत स्थान पर बैठकर पढ़ाई करें।
टेबल-चेयर पर भी पढ़ाई कर सकते हैं। बच्चों को भोजन भी समय पर करना चाहिए। इसके अलावा स्कूल की ड्रेस पहनकर उचित तरीके से पढ़ाई करें। इससे मन में सकारात्मकता आएगी। मन में अच्छे विचार लाएं और परिवार के साथ भी कामों में हाथ बंटाए।
डॉक्टरों की सलाह- फैमिली मेंबर मिलकर खेलें बच्चों के साथ
सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. राजेश कुमार का कहना कि बच्चों को इस मनोस्थिति से उबारने के लिए उनके साथ मिलकर ऐसे गेम खेलने चाहिए, जो कंप्यूटर या मोबाइल से कनेक्ट नहीं हो। जैसे कि लूडो या कैरम या कोई अन्य गतिविधियां जिसमें परिवार के साथ खेला जा सकता है। ऐसा इसलिए कि बच्चों का मोबाइल या कंप्यूटर में गेम खेलने की बजाय दूसरी तरफ ध्यान बंट जाए। इस तरह की दिक्कत हाई स्कूलों के बच्चों में ज्यादा आ रही है। लड़कियाें को घर में मां के साथ किचन में काम करने की सलाह दी जाती है। मां के साथ घर के काम में हाथ बंटाने से उनमें सकारात्मकता आएगी।
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from KAPS Krishna Pandit

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