सड़कों पर जाम लगा रहे वाहनों व रेहड़ियों के लिए पार्किंग व स्ट्रीट वेंडिंग जोन चिन्हित कर भूले मेयर व अधिकारी
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सड़कों पर जाम लगा रहे वाहनों व रेहड़ियों के लिए पार्किंग व स्ट्रीट वेंडिंग जोन चिन्हित कर भूले मेयर व अधिकारी

शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नगर निगम मेयर व अफसरों ने डेढ़ साल में योजनाएं तो कई बनाईं। लेकिन इनमें से किसी पर धरातल पर काम नहीं दिख पाया। जाम की वजह बन रहे सड़कों पर खड़े वाहनों व रेहड़ियों के लिए पार्किंग व स्ट्रीट वेंडिंग जोन चिन्हित कर मेयर व अफसर भूल गए, एेसा शहर के लोगों को अब लग रहा है। यही नहीं निगम के 20 साल पुराने किराएदारों को न तो कलेक्टर रेट पर दुकानों की मलकियत मिल पाई और न शहर के चारों ओर प्रवेश द्वारों पर महापुरुषों के नाम पर एंट्री गेट ही बन पाए। उधर, आठ साल से बंद कैल कचरा प्लांट को चलाने से लेकर जमीन की पहचान के सर्वे का काम भी अफसर पूरा नहीं कर पाए हैं।

मेयर व निगम अफसरों की ओर से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जनवरी-2020 में शहर में छह स्ट्रीट वेंडिंग जोन चिन्हित किए गए थे। इनमें सेक्टर-17 में पंडित ऑटोमोबाइल के सामने बड़े नाले के साथ लगती जमीन (47 वेंडर्स), नेहरू पार्क के साथ डीएवी डेंटल के पास खाली पड़ी जमीन (470 वेंडर्स), स‌ब्जी मंडी आईटीआई ग्राउंड (740 वेंडर्स), ईएसआई अस्पताल के पीछे तेजली ग्राउंड (1254 वेंडर्स), मेन पोस्ट ऑफिस के पास सरोजनी कॉलोनी मार्केट (149 वेंडर्स), वर्कशॉप रोड हीरानगर (46 वेंडर्स) शामिल हैं।

यहां पंजीकृत 2200 स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शेड, पेयजल, टॉयलेट व अन्य सुविधा देकर शिफ्ट करना था। इसी तरह खासकर रेलवे रोड पर जाम की दिक्कत दूर करने को दिसंबर-2019 में पार्किंग के लिए पुराना रादौर रोड पर निगम की खाली जमीन व जनवरी-2020 में लक्ष्मी सिनेमा रोड पर पार्किंग जोन चिन्हित किए गए। लेकिन अभी तक इन स्ट्रीट वेंडिंग व पार्किंग जोन की प्रपोजल फाइल भी तैयार नहीं हुई है, जिस पर टेंडर के लिए यूएलबी से मंजूरी ली जा सके। एेसे में काम शुरू होंगे इस बारे में अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

20 साल पुराने किराएदारों को कलेक्टर रेट पर नहीं मिली दुकानें| नगर निगम के 20 साल पुराने किराएदारों को जमीन के कलेक्टर रेट पर दुकानों की मलकियत देने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई। हालांकि आवेदन लेकर जांच के लिए गठित तीन सदस्य कमेटी में ईओ, जोनल टैक्सेशन ऑफिसर व एटीओ शामिल किए थे। एक दर्जन से अधिक आवेदन फाइल जमा हुईं, लेकिन अफसरों के ट्रांसफर व स्कीम के कई बिंदु स्पष्ट न होने से अफसर उलझन में हैं कि क्या करें? जिससे योजना कागजों में ही अटकी है।

स्कीम की शर्तानुसार किराएदार को दुकान का बकाया किराया ब्याज सहित चुकने व अतिक्रमण व कब्जे हटाने का नियम तय है। लिखित एप्लीकेशन में दुकान के साइज व किराए से लेकर अपनी डिटेल देनी है। कमेटी की तैयारी रिपोर्ट पर अप्रूवल के बाद किराएदार को जमीन के कलेक्टर रेट पर दुकान की मलकियत दी जानी थी, लेकिन अभी किसी आवेदक को यह लाभ नहीं मिल पाया है।

यहां भी पिछड़े- एंट्री गेट बने नहीं, शिफ्ट डेयरियां लौटीं| शहर के चोरों ओर महापुरुषों के नाम पर एंट्री गेट के डिजाइन के लिए नगर निगम ने आर्किटेक्चर हायर करने का टेंडर किया, लेकिन डिजाइन तैयार कराने के आगे बात नहीं बढ़ी। अभी एस्टिमेट से लेकर टेंडर प्रक्रिया अधूरी है। वहीं कुछ माह की सख्ती से शहर से बाहर दड़वा कांप्लेक्स में शिफ्ट हुईं दूध डेयरियां में से काफी लौट आई हैं, जो अब सीवर व नालियां ब्लॉकेज की वजह बन रहीं हैं।



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