मजदूरों की कमी से धान के रकबे में आ सकती है 12 से 15 हजार हेक्टेयर की कमी, सोयाबीन की नई वैरायटी आने से रकबा बढ़ने की उम्मीद, मक्का का भी बढ़ेगा रकबा
| कहीं थाली से गायब न हो जाये चावल |
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| सोयाबीन का खेत तैयार करता किसान |
अधिकांश किसान धान की खेती को मानते हैं फायदे का सौदा -
क्षेत्र के किसानों को मजदूर ना मिलने से भले ही धान का साथ छोड़ने को मजबूर कर दिया हो मगर अब भी कई किसान धान को ही लाभकारी मानते हैं उनका कहना है कि सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि की स्थिति में खराब हो जाती है वहीं धान मैं अधिक बारिश होने पर भी नुकसान नहीं होता | सतलापुर के किसान फूलचंद वर्मा ने बताया कि उन्होंने 3 वर्ष पहले अपने खेत में सोयाबीन की फसल बोई थी, जो अधिक बारिश होने से पूरी तरह चौपट हो गई थी | इसलिए अब तो वह धान की ही खेती करते हैं धान की फसल में अधिक बारिश होने पर भी नुकसान नहीं होता | वहीं क्षेत्र में काली मिट्टी धान के अनुकूल है जिसके चलते इस क्षेत्र में पूसा बासमती एवं धान की अन्य किस्मों की अच्छी पैदावार होती है |
इसलिए और बड़ा रुझान -
इटायाकला के किसान चंदन सिंह पटेल बताते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा धान को समर्थन मूल्य पर खरीदने से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है इससे भी क्षेत्र में किसानों का धान की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है |
धान की सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त मात्रा में जरूरी है इसके अलावा धान की फसल में पर्याप्त पानी व मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए छोटी इकाइयों में इसकी रोपाई की जाती है जिसके लिए किसानों ने अपने खेतों में छोटे आकार के गटे बनाने के साथ ही धान का रोपा डालना भी शुरू कर दिया है |
इस बार कोरोना महामारी के कारण धान की रोपाई का कार्य बहुत प्रभावित हो रहा है, मजदूर ना मिलने से किसान धान का रोपा नहीं डलवा पा रहे हैं | ऐसे में अब विकासखंड के अधिकांश किसानों ने सोयाबीन की नई किस्म का उत्पादन करने का मन बना लिया है, विभाग द्वारा भी ऐसे किसानों को बीज उपलब्ध कराया जा रहा है | - डीएस भदोरिया, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी,औबेदुल्लागंज



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