ढाकोड़ा पावर हाउस की बिजली सप्लाई बीते एक महीने से दिन में 8 घंटे ब्रेक डाउन रहती है, जिस कारण करीब 15 गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों ने इस समस्या से निगम को अवगत करवा दिया, इसके बावजूद समाधान प्रक्रिया आरंभ नहीं हुई। जिससे परेशान ग्रामीणों में सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश पनपना आरंभ हो गया।
जानकारी के अनुसार अमरपुरा, नांगल सोडा, थनवास, आसरावास, मौरूंड, नियामतपुर के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत द्वारा जमीन उपलब्ध कराने के बाद निगम ने ढाकोड़ा में पावर हाउस स्थापित कर दिया। जिससे 18-20 गांव व ढाणियों को बिजली सप्लाई सुचारू कर दी गई, लेकिन निगम ने गांवों में 45 साल पहले बिछाई गई लाइनों का नवीनीकरण नहीं किया। गांवों की अधिकतर लाइनें ढीली लटक रही हैं, और पेड़ों को टच करती हुई गुजर रही हैं। दूसरी ओर सप्लाई का लोड हर महीने बढ़ रहा है। जिस कारण जर्जर तार लाल होकर टूटने की समस्या बढ़ गई।
थोड़ी हवा चलते ही तार स्पार्क हो जाते हैं। एक लाइन की रिपेयर होती नहीं, इससे पहले दूसरी लाइन भी ब्रेक डाउन होने की कंप्लेंट दर्ज हो जाती हैं। ऐसे में ग्रामीणों को रातभर बिजली सप्लाई नहीं मिलती। कई गांवों में पेयजल संकट बढ़ गया, साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढऩे से ग्रामीणों को नींद लेना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि बूंदाबांदी शुरू होने पर उन्हें मकान के अंदर सोना पड़ता है। बिजली सप्लाई ठप होने की वजह से पंखा चलाना संभव नहीं होता। इस दौरान मच्छर काटने लगते हैं, जिससे लोगों को मलेरिया व डेंगू होने का खतरा बढ़ गया।
समस्या से बिजली निगम के अधिकारियों को अवगत करवा दिया। उन्होंने ५-७ दिन में पुरानी तारों को हटाकर नए बिछाने का आश्वासन दिया था। जिसे करीब एक महीना बीत चुका है, अभी तक स्थिति यथावत बनी हुई है, जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन दिन में पुरानी तारों को हटाने का अल्टीमेटम दिया है।
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