कोयले की कमी से प्रदेश के तापगृहों की सांसें उखडऩे लगी
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कोयले की कमी से प्रदेश के तापगृहों की सांसें उखडऩे लगी



कोयले की कमी से प्रदेश के तापगृहों की सांसें उखडऩे लगी

भोपाल । बिजली की कमी ने प्रदेश सरकार की तैयारियों की पोल खोल दी है। वैसे तो प्रदेश में 22 हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता के दावे किए जा रहे थे लेकिन साढ़े 12 हजार मेगावाट बिजली की मांग पहुंचते ही संकट खड़ा हो गया। बिजली मामलों के जानकर अब सवाल कर रहे हैं कि जब प्रदेश के पास 22 हजार मेगावाट बिजली का करार है तो फिर संकट क्यों हो रहा है। इधर मप्र पावर जनरेशन कंपनी के तापगृह में भी महज चार दिन का कोयला ही बचा हुआ है। जिससे साफ है कि फुल लोड पर इकाईयां चली तो उन्हें कोयले की कमी के कारण बंद करना पड़ सकता है। बीते 22 अप्रैल को प्रदेश में हर घंटे बिजली की कमी के कारण अघोषित कटौती की गई।प्रदेश में बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह कोयला है। माइंस से रेलवे की रैक पर्याप्त नहीं मिल पा रहे हैं इस वजह से कमी है। ज्यादातर इकाईयां कोयले से बिजली बनाती है। इसके अलावा बिजली की बैकिंग इस समय होती है क्योंकि रबी सीजन के लिए ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। कुछ बिजली को अन्य एक्सचेंज के जरिए बेचा जा रहा है। ऐसे में कृत्रिम बिजली की कमी बनी हुई है।
 प्रदेश सरकार के बिजली उपलब्धता के 22 हजार मेगावाट के दावे पर प्रबंध संचालक मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी विवेक पोरवाल ने कहा कि 22 हजार मेगावाट अलग-अलग श्रेणी में बिजली के करार है। कोयला से बनने वाली बिजली का 14 हजार मेगावाट हिस्सा है जिसमें 80 फीसद ही इकाई से बिजली उत्पादन होता है जो करीब 10-11 हजार मेगावाट है। इसके अलावा हवा,न्यूिक्लियर, सोलर से बिजली मिलती है। कई बार मौसम और हवा नहीं चलने से इनका हिस्सा पर्याप्त नहीं मिलता है। विवेक पोरवार के अनुसार प्रदेश में कहीं कोई बिजली का संकट नहीं है। कभी थोड़ी कमी होती है तो एक्सचेंज के जरिए खरीद ली जाती है। उन्होंने माना कि रबी सीजन के लिए प्रदेश में 600 मेगावाट बिजली बैकिंग की जा रही है वहीं कुछ बिजली बेच रहे हैं। कोयले की कमी को लेकर भी कहा कि इस बारे में उनके पास बहुत बेहतर जानकारी नहीं है लेकिन कोयले की कमी नहीं है।
 मप्र में विगत 22 अप्रैल को रात्रि 12 बजे से हर घंटे बिजली की कमी बनी रही। इसमें सिर्फ सुबह 9 बजे 11 बजे के बीच बिजली मांग के अनुरूप मिली। इसके अलावा कमी के दौरान अघोषित कटौती की गई। शाम सात बजे सबसे कम 282 मेगावाट की कमी बनी रही। उस वक्त 11138 मेगावाट की मांग प्रदेश में थी। इसके बाद सबसे ज्यादा कमी शाम चार बजे 1612 मेगावाट की हुई। उस समय बिजली की दिन की सर्वाधिक मांग 12680 मेगावाट थी। बिजली विभाग के निर्धारित मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कटौती के माध्यम से पूरा किया गया। गांव में बिजली की अघोषित कटौती 4-5 घंटे की हुई।




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