आत्म केन्द्रित आधुनिक जीवन-शैली में परिचय सम्मेलनों की भूमिका महत्वपूर्ण
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आत्म केन्द्रित आधुनिक जीवन-शैली में परिचय सम्मेलनों की भूमिका महत्वपूर्ण


आत्म केन्द्रित आधुनिक जीवन-शैली में परिचय सम्मेलनों की भूमिका महत्वपूर्ण

भोपाल : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आत्म केन्द्रित आधुनिक जीवन-शैली में वैवाहिक संबंधों में परिचय सम्मेलनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आदिवासी सेवा मंडल वैवाहिक संबंधों के समन्वय में शिक्षितों का सहयोग लें। हर गाँव में पढ़े-लिखे भाई-बहनों को चिन्हित करें, जो वैवाहिक संबंधों की पहल कर वैवाहिक गठबंधनों में परिवारों का सहयोग करें।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल आदिवासी सेवा भोपाल मंडल द्वारा आयोजित युवक-युवती परिचय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पर्यावरण-संरक्षण और समाज-सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए श्री शरद सिंह कुम्हरे को स्व. उर्मिला सिंह स्मृति सम्मान और चिकित्सक समाज सेवी आयुर्वेदाचार्य श्री यशवंत ठाकुर टेकाम को स्व. डॉ. बी.एल सिंह सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री यशवंत ठाकुर का सम्मान उनके प्रतिनिधि द्वारा प्राप्त किया गया।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सामाजिक जीवन में परिवार महत्वपूर्ण संस्था है। सफल पारिवारिक जीवन का आधार दीर्घ-जीवी वैवाहिक जीवन होता है। अत: विवाह संबंधों का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। विवाह के पूर्व गंभीरता से सभी आयामों पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। विवाह संबंधों में जल्द-बाजी नहीं करनी चाहिए। युवक-युवती को एक-दूसरे को समझने का अवसर दिया जाना चाहिए। पालकों को भी बच्चों की मर्जी को महत्व देना चाहिए। वैवाहिक संबंध एक पवित्र रिश्ता है, जिसे जीवन भर निभाना चाहिए। एक-दूसरे के दुख-सुख में साथ देना चाहिए। पति-पत्नी में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता है। परिवार की जिम्मेदारियों में दोनों की सामान जिम्मेदारी होती है। इसी का प्रतीक विवाह के फेरों की परंपरा है। पहले चार फेरों में वर आगे रहता है। बाद के तीन फेरों में वधु आगे रहती है। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच नोंक-झोंक होना स्वाभाविक है। पूर्वाग्रह से विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने आदिवासी सेवा मंडल द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक जीवन-मूल्यों और समाज की बेहतरी में सामाजिक संगठनों की क्रियाशीलता अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि समाज में सामूहिकता से सहयोग, सामंजस्य और उदारवादी भावनाओं के विकास में सहयोगी हो।

प्रारंभ में राज्यपाल श्री पटेल ने बड़ा देव मंदिर में पूजन-अर्चन किया। राज्यपाल का जनजातीय परंपरा के अनुसार वाद्य यंत्रों की ध्वनि तरंगों में थिरकते हुए पारंपरिक नृत्य से स्वागत किया गया। पुष्प-गुच्छ, पीला गमछा और हल्दी का तिलक लगाकर सम्मान और स्मृति-चिन्ह भेंट किया। मंथन आर्ट ग्रुप के बच्चों ने नृत्य-गीत की प्रस्तुति दी, युवक-युवतियों ने स्वयं का परिचय देते हुए भावी जीवन साथी के संबंध में अपनी अपेक्षाएँ बताई। इस अवसर पर आदिवासी सेवा मंडल के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के सदस्य मौजूद थे।





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