छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर (नई राजधानी) के प्रभावित 27 गांवों के किसान अपनी आठ मांगों को लेकर करीब दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि किसानों की छह मांगें मान ली गई हैं। वह उनसे कई बार आंदोलन खत्म करने का आग्रह कर चुकी है। जबकि आंदोलनकारी किसान इसे सरकार की भ्रम फैलाने की साजिश बात रहे हैं। किसानों का नेतृत्व कर रहे रूपन चंद्राकर का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होगी, आंदोलन खत्म नहीं होगा।
इसी बीच शुक्रवार को आंदोलन के दौरान 68 वर्षीय किसान सियाराम पटेल की मौत हो गई। उन्हें ब्लड प्रेशर का मरीज बताया जा रहा है। रविवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मृतक के स्वजन को चार लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। बता दें कि राजधानी रायपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर नवा रायपुर बसाया गया है। इसके लिए 27 गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है।
किसान सभी 27 गांवों में पट्टा देने के साथ ही भूमिहीन सभी वयस्क विवाहित हों या अविवाहित, तीन जनवरी 2022 को 18 वर्ष आयु पूर्ण करते हों, उन्हें 1200 वर्गफीट जमीन एक रुपये लीज रेट पर देने की मांग कर रहे हैं। सरकार 13 गांवों में पट्टा देने को राजी हो गई है। नवा रायपुर में होने वाले टेंडर में 60 प्रतिशत कर्मचारी प्रभावित ग्राम से हों, यह शर्त जोड़ने की मांग पर भी सरकार राजी हो गई है। नवा रायपुर के विभिन्न सेक्टरों में निर्मित 75 प्रतिशत दुकानें, गुमटी, चबूतरा और हाल का आवंटन लागत मूल्य पर आवेदन आमंत्रित कर लाटरी के माध्यम से परियोजना प्रभावित परिवारों को करने का फैसला किया गया है। लेयर-11 के गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री के लिए अनुमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
चार गुना मुआवजा की मांग का मामला हाई कोर्ट में लंबित है। इसी तरह प्रभावित किसानों को सरकार की तरफ से 15 हजार रुपये महीना दिया जा रहा था। यह राशि 2031 तक दी जानी है, लेकिन आडिट आपत्ति के कारण 2018 से इसका भुगतान रोक दिया गया है।सरकार जिन छह मांगों को पूरा करने की बात कह रही है, उनमें से पांच तो 2013 में सशक्त समिति की 12वीं बैठक में लिए गए निर्णय मात्र हैं, जिसका समग्र परिपालन न भाजपा शासनकाल हुआ था, न वर्तमान कांग्रेस सरकार कर रही हैं।


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