इंदौर । शहर में जनवरी से अब तक 155 लूट की वारदातें हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 64 लूट की वारदातें हुई थीं। यदि देखा जाए तो इस वर्ष हर महीने लगभग 15 लूट हुई हैं।
शहर में अनलॉक होने के बाद चोरी व लूट सहित सभी प्रकार के अपराध तेजी से बढ़े, लेकिन इन सब में लूट की घटनाएं सबसे अधिक हुई हैं। आये दिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बैग, मोबाइल और चेन लूट हो रहीं है। शनिवार को ही एक युवती के साथ स्कीम 78 में मोबाइल लूट की वारदात हुई, जिसकी रिपोर्ट पुलिस ने 24 घंटे बाद दर्ज की।
शहर में हो रही लूट के कई कारण हैं। जेल से पैरोल पर कई बदमशों को छोड़ा गया है। उनके पास कमाई का साधन नहीं है, जिसके चलते वे इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। वहीं दूसरा कारण कोरोना के कारण आई बेरोजगारी है। दोगुना से अधिक घटनाएं बढ़ना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रही है।
लूट के बजाए चोरी की धारा में होते हैं केस दर्ज
मोबाइल लूट की घटनाओं में पुलिस आमतौर पर केस दर्ज नहीं करती। करती भी है तो चोरी का दर्ज करती है। इसका प्रमाण विजय नगर और कनाड़िया में पकड़े गए गिरोह हैं। इन गिरोह ने शहर में 50 से अधिक मोबाइल लूट की घटनाएं कबूल की थीं। बड़ी संख्या में मोबाइल भी जब्त हो गए थे, लेकिन पुलिस को इन मामलों में फरियादी नहीं मिल रहे थे, क्योंकि ज्यादातर मामलों में पुलिस ने आवेदन लेकर लोगों को चलता कर दिया था, केस तक दर्ज नहीं किया था।
यही हाल चेन लूट की घटनाओं का है। कुछ मामलों में तो पुलिस ने महिलाओं की चेन लूटने वालों के खिलाफ लूट का केस ही दर्ज नहीं किया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आधे से ज्यादा मामलों में पुलिस चेन लूट के मामले में चोरी की धाराओं में केस दर्ज करती है।

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