
कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष की राजनीति को गरमाने के लिए दिल्ली पहुंच रही हैं। संसद सत्र से पहले उनके तीन दिवसीय दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। समझा जाता है कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद वह बीएसएफ के अधिकारों समेत कई और मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश करेंगी। कृषि कानूनों के विरोध में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस संसद में सर्वाधिक मुखर रही है। वह लगातार संसद के भीतर और बाहर इसका विरोध करती रही है और पिछले सत्र में भी उसने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। अब जब कानून वापस होने का ऐलान हो चुका है तो विपक्ष को एक बार फिर से संसद में सरकारी की घेराबंदी करने का मुद्दा मिल गया है। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत विपक्ष के अनेक नेताओं से मुलाकात कर सकती हैं। हालांकि, किसी औपचारिक बैठक की अभी सूचना नहीं है। इस बीच वह प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगी और बीएसएफ को सीमा से 50 किलोमीटर क्षेत्र के दायरे में अधिकार दिए जाने के मुद्दे पर बात करेंगी। समझा जाता है कि पार्टी इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाने के पक्ष में है जिसमें वह अन्य दलों का भी समर्थन चाहती है। इस बीच भाजपा के नाराज सांसद वरुण गांधी के भी ममता बनर्जी से मुलाकात की चर्चाएं हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन जिस प्रकार वरुण गांधी लगातार केंद्र सरकार के फैसलों का विरोध कर रहे हैं। उससे इस बात में भी कोई आश्चर्य नहीं होगा कि वह भी बाबुल सुप्रियो की राह पकड़ लें। बता दें कि इससे पूर्व ममता बनर्जी बंगाल चुनाव जीतने के बाद दिल्ली आई थी और विपक्ष को एकजुट करने के प्रयासों में जुटी रही थीं। इस दौरे को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है।

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