मंदसौर । मप्र के मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील में चंबल नदी किनारे बसा हुआ छोटा सा ग्राम भगोर। यहां नवरात्र के समापन पर नवमी को ज्वारा विसर्जन के साथ ही चूल भी जलाई गई। ग्रामीण इसे वाड़ी विसर्जन कहते हैं। आस्था और भक्ति से सराबोर भक्त अंगारों पर चल कर अपनी भक्ति की अग्नि परीक्षा देते हैं। इस तरह के आयोजन जिले के कई गांव में होते हैं।
नवरात्र में घट स्थापना से लेकर नवमी तक श्रद्धालु मां की आराधना के दौरान गरबा रास और अन्य कार्यक्रम हुए। नवरात्र के अंतिम दिन माता के विसर्जन के दौरान दिनभर हवन पूजन का कार्यक्रम हुआ। शाम को चूल प्रज्ज्वलित की गई।कहा जाता है कि अपनी मन्नत पूरी होने पर यह परंपरा निभाई जाती है।
आठ फीट लंबी चूल को देशी घी व लकड़ियों से किया प्रज्ज्वलित
नवमी पर गुरुवार को ज्वारा विसर्जन के दौरान करीब ढाई फीट चौड़ी और आठ फीट लंबी चूल बनाई गई। इसमे सूखी लकड़ियां व कोयले डाले गए। इसके बाद ग्रामीणो ने देशी घी डालकर पूजा अर्चना कर विधि विधान से अग्नि को प्रज्ज्वलित की। इसके बाद माता के लगभग 200 से अधिक भक्त इन दहकते अंगारों पर नंगे पैर निकले।
अब तक नही हुआ कोई हादसा
ग्रामीणों व भोपाजी का कहना है कि यह सब माता की भक्ति व उसके प्रति आस्था का ही कमाल है। चूल के बीच से इन अंगारों पर आज तक कभी कोई भक्त न तो चोटिल हुआ है और न ही कोई दुर्घटना हुई है। भक्तों में आस्था भी ऐसी है कि दहकते अंगारों पर बच्चे भी बेखौफ होकर निकल जाते हैं।

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