कोरोना संक्रमण के बीच ब्लैक फंगस ने केंद्र और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। मामलों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। महाराष्ट्र में भी इसे अन्य राज्यों की तरह महामारी घोषित किया गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने राज्य में कोरोना की स्थिति के बार में बताते हुए कहा कि वर्तमान में कोविड पॉजिटिव रेट 12% प्रतिशत है। साथ ही उन्होंने रिकवरी रेट 93 प्रतिशत होने की बात कही है।
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि राज्य में ब्लैक फंगस के 2,245 मामले हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत, इसके मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा। आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने ब्लैक फंगस को नोटिफाइड बीमारी के रूप में घोषित किया है।
टीकाकरण की स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें वैक्सीन खरीद के लिए वैश्विक निविदा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हम केंद्र सरकार से निविदा जारी करने और हमें टीके उपलब्ध कराने का अनुरोध कर रहे हैं।
पांच साल से कम आयु के बच्चों को इन्फ्लुएंजा रोधी टीका लगाने का अनुरोध
महाराष्ट्र में आदिवासी कल्याण समिति का नेतृत्व करने वाले पूर्व विधायक विवेक पंडित ने राज्य सरकार से मॉनसून के आगमन से पहले राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को इन्फ्लुएंजा रोधी टीका लगाये जाने की अपील की है। पंडित ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बारिश के मौसम के दौरान बच्चों में इन्फ्लुएंजा फैलने की आशंका जतायी है। इसे सामान्य तौर पर फ्लू कहा जाता है। उन्होंने कहा कि देश पहले से ही कोविड-19 महामारी के संकट से जूझ रहा है।
पंडित ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को इन्फ्लुएंजा रोधी टीका लगाने का अनुरोध किया और सभी जिला अधिकारियों को निगरानी अधिकारी बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गरीब आदिवासी इनफ्लुएंजा रोधी टीके का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं जिसकी कीमत 1,500 और 2,000 रुपये के बीच है। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार को मॉनसून आने से पहले इन बच्चों को निशुल्क टीका लगाने के लिए अभियान चलाना चाहिए।
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