कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन ने हालांकि तमाम कदम उठाए हैं। लेकिन इसके बावजूद कोरोना मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को शहर में एक और पॉजिटिव केस सामने आया। अब तक 66 केस सामने आ चुके हैं। लॉकडाउन के पहले तीन चरणों में जहां यह आंकड़ा तीन मरीजों का था। वहीं चौथे चरण से अनलॉक-1 में अब तक 63 केस मिल चुके हैं।
बता दें कि कुरुक्षेत्र में मार्च से लेकर मई के पहले 3 हफ्ते तक सिर्फ 3 केस मिले थे। लॉकडाउन के चौथे चरण में मूवमेंट की इजाजत लोगों को मिली। दूसरे राज्यों में फंसे हजारों लोग घरों को लौटे। जिसके चलते मई के तीसरे हफ्ते में सुरक्षा चक्र टूट गया। 20 मई को एक साथ 6 केस सामने आए। 31 मई तक 11 दिनों में 32 मामले सामने आ गए। लेकिन जून में यह आंकड़ा और बढ़ता दिख रहा है। 12 जून तक 31 केस आ चुके हैं। खुद एससीएस व कुरुक्षेत्र के कोविड-19 को लेकर इंचार्ज बनाए अधिकारी भी मान रहे हैं कि जुलाई तक यह आंकड़ा काफी ज्यादा होगा।
केंद्र की तरफ इसकी ग्रोथ रेट 72 प्रतिशत के हिसाब से मानी जा रही है। हालांकि जिला प्रशासन इस अनुमान से इत्तफाक नहीं रख रहा। डीसी धीरेंद्र खड़गटा का कहना है कि अभी तक कुरुक्षेत्र में स्थिति एक तरह से कंट्रोल में है। केंद्र की रिपोर्ट को लेकर चर्चा चल रही है। यह अनुमान गलत हो सकता है। लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा। आगे के लिए पूरी तैयारियां की जाएंगी।
जुलाई में 2260 बेड की जरूरत| एससीएस केंद्र की रिपोर्ट व अनुमानित आंकड़ाें के हिसाब से जुलाई अंत तक कुरुक्षेत्र में मरीजों की संख्या बढ़ना मान रहे हैं। इसे देखते हुए गुरुवार को प्रशासन को स्पेशल प्लान के तहत तैयारियों के भी आदेश दिए। अनुमान लगाया है कि जुलाई अंत तक जिले में 2260 बेड की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा आॅक्सिजन के साथ 380 बेड की जरूरत होगी। वहीं 106 वेंटिलेटर के साथ बेड की जरूरत पड़ सकती है। नोडल अधिकारी डाॅ. एसएस फुलिया का कहना है कि कुरुक्षेत्र में फिलहाल 1200 के करीब बेड उपलब्ध हैं। हालांकि जिस तरह कुरुक्षेत्र में केस मिल रहे हैं, उसे देखते हुए उम्मीद है कि इतने बेड की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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